jeevan ki aadharshila- meri kavita
Sunday, 3 August 2014
bas ek khayal
आज की दर्रारो में से झाकता कल है
खोया खोया जीवन का हर पल है
किससे कहु व्यथा इस मन की
तनहा यौवन से या बीते बचपन से
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